छत्तीसगढ़ पावर प्लांट हादसा: मलबे में तलाश और अपनों की अधूरी शिनाख्त, क्या राख में तब्दील हो गए लापता मजदूर?
Chhattisgarh Power Plant Tragedy
रायपुर: Chhattisgarh Power Plant Tragedy, छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार को हुआ बॉयलर विस्फोट अब एक नई और डरावनी मानवीय त्रासदी की ओर बढ़ रहा है। आधिकारिक तौर पर 13 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन ग्राउंड जीरो से आ रही खबरें दिल दहला देने वाली हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्लांट में काम करने वाले कई श्रमिक अब भी लापता हैं। वे न तो अस्पतालों की सूची में हैं और न ही सुरक्षित अपने घर पहुंचे हैं।
राख में तब्दील हुए शरीर
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों और घायलों के शरीर इस कदर झुलस चुके हैं कि उनकी शिनाख्त करना परिजनों और प्रशासन के लिए पहाड़ जैसी चुनौती बन गया है। अस्पताल के मुर्दाघर में रखे कई शवों की हालत ऐसी है कि चेहरे पहचान में नहीं आ रहे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि वे अपनों के शव को भी आखिरी बार पहचान नहीं पा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को अंततः डीएनए टेस्ट का सहारा लेना पड़ सकता है।
प्लांट के भीतर मेरा छोटा भाई पेंटिंग का काम कर रहा था। धमाके के बाद से उसका मोबाइल बंद है। हमने आसपास के सभी अस्पतालों (रायगढ़, बिलासपुर) में देख लिया, उसका कहीं पता नहीं है। पुलिस और प्लांट मैनेजमेंट हमें कुछ नहीं बता रहे।
पीड़ित परिजन
कहां गए लापता मजदूर?
विस्फोट के समय बॉयलर यूनिट के पास बड़ी संख्या में श्रमिक पेंटिंग और तकनीकी काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि वहां मौजूद लोग हवा में उछलकर दूर जा गिरे। परिजनों का दावा है कि प्लांट के भीतर काम करने गए कई लोग अब भी लापता हैं। लापता श्रमिकों के घरवाले प्लांट के गेट और अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं मिल रही है। डर है कि कुछ शव मलबे में दबे हो सकते हैं या धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ शरीर पूरी तरह राख हो गए।